तो वह बंद होने के कगार पर पहुंच गई। लेकिन इसके संस्थापक ने हार नहीं मानी
और काम जारी रखा। सिर्फ 14 सालों में यह कंपनी दुनिया की सबसे धनाढ्य कंपनी
हो गई और इसकी दौलत एक बार तो अमेरिकी सरकार से भी ज्यादा हो गई थी।
हम बात कर रहे हैं अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐप्पल की जिसने आईफोन और आईपैड
बेचकर अकूत दौलत कमाई। इसकी स्थापना की थी स्टीव जॉब्स ने और उन्होंने अपनी
दूरदर्शिता, लगन और टेक्नोलॉजी की मदद से इसे सबसे धनी कंपनी बना दिया। उसके
धन का आलम यह है कि यूरोप के तमाम बड़े बैंकों की कुल आमदनी भी उतनी नहीं है।
ऐप्पल का जन्म 1 अप्रैल 1976 को क्युपिटिनो में हुआ था। इसे शुरू करने वालों
में थे, स्टीव जॉब्स, स्टीव वोजनिएक और रॉनल्ड वेन। वेन ने अगले साल ही महज
800 डॉलर में अपने शेयर बेच दिए थे। उसने सबसे पहले कंप्यूटरों की दुनिया में
कदम रखा और 1976 में ऐप्पल कंप्यूटर पेश किया। उसके बाद उसने 1980 में
मैकिनतोश सीरीज के कंप्यूटर निकाले। 2001 में उसने आईपॉड निकाला और 2007 में
आईफोन। 2010 में उसने आईपैड पेश किया। इस आईपैड ने आईफोन की तरह दुनिया हिला
दिया। सितंबर 2010 में कंपनी की कुल बिक्री 65.23 अरब डॉलर की थी। इसे 18.39
अरब डॉलर का शुद्ध लाभ हुआ था।
ऐप्पल के पहले कंप्यूटर की कीमत थी 666.6 डॉलर और यह सफल रहा था। उसके बाद का
मॉडल ऐप्पल लीजा उसका सबसे असफल उत्पाद रहा। उसकी कीमत 10,000 डॉलर थी। लेकिन
बाद के सभी उत्पाद सफल रहे।
स्टीव जॉब्स ने इस व्यवसाय का गुरुमंत्र जान लिया था कि नई टेक्नोलॉजी ही
उनकी कंपनी को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाएगी। इसका पायदा उठाकर उन्होंने
इस कंपनी को बुलंदियों तक पहुंचाया।
स्टीव जॉब्स के इस्तीफे के बाद देखना है कि इसके नए सीईओ टिम कुक क्या रणनीति
अपनाते हैं। यह कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा


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