सरकार से बातचीत फेल
टीम अन्ना के सक्रिय सदस्य अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी सरकार के तारणहार बने प्रणव मुखर्जी के साथ नार्थ ब्लॉक में चल रही बातचीत खत्म हो चुकी है। टीम अन्ना ने कहा है कि सरकार से बातचीत फेल हो चुकी है। जनलोकपाल बिल को सरकार ने स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया है। इसका हम लोग शुरू से विरोध कर रहे थे।
अरविंद केजरिवाल ने कहा कि सरकार ने एक नया ड्राफ्ट बनाया है। किरण वेदी तो काफी गुस्से और हताश थी। उन्होंने तो यहां तक कह डाला कि सरकार ने हमें डांटा है। केजरिवाल के मुताबिक सरकार जनलोकपाल बिल से मुकर रही है। इसकी वजह से अब अन्ना का अनशन नहीं टुटेगा। बैठक के लिए रवाना होने से पहले केजरीवाल ने रामलीला मैदान से कहा कि यदि अन्ना को कुछ हुआ तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी। टीम अन्ना ने दावा किया है कि सरकार अन्ना को जबरदस्ती अस्पताल भेज सकती है। दूसरी ओर, डॉक्टर त्रेहन प्रधानमंत्री ने मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। जहां उन्होंने अन्ना की सेहत की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।
रामलीला मैदान में चल रहे अन्ना हजारे के अनशन ने रामलीला मैदान का तो माहौल गर्म कर ही रखा था लेकिन आज टीम अन्ना ने भी बेहद आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। अरविंद केजरीवाल ने मंच पर आकर दो टूक शब्दों में कहा कि यदि अन्ना को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री कहते हैं कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हम यह साफ करना चाहते हैं कि यदि कुछ भी होता है तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि अब तक उन्हें दो करोड़ लोगों का समर्थन मिल चुका है। लोगों को संबोधित करते हुए अरविंद ने कहा कि अभी तक दो करोड़ लोगों ने मिस कॉल किया है। जो लोग इस बात को सुन रहे हैं वो समझ ले कि दो करोड़ लोग इस आंदोलन के साथ जुड़ चुके हैं।
हमारा कहना है कि सरकार केंद्र में जनलोकपाल लेकर आए और राज्यों में लोकायुक्त लेकर आए। सरकार का पक्ष है कि चिदंबरम और कपिल सिब्बल जी का कहना है कि संवीधान के मुताबिक यह नहीं हो सकता। मेरे पास यह संवीधान है। संवीधान की सूचि में साफ साफ लिखा है कि केंद्र सरकार यह कानून बना सकती है। हम कपिल सिब्बल और चिदंबरम से पूछना चाहते हैं कि किस धारा के तहत ये कानून नहीं बनाया जा सकता। हमसे पूछे हम बता सकते हैं कि किस धारा के तहत यह बन सकता है। अरविंद केजरीवाल ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि यदि अन्ना को कुछ भी हुआ तो सीधे तौर पर जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
प्रणब से टीम अन्ना की मुलाकात जारी
रामलीला मैदान में लोगों के संबोधित करने के बाद अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी यूपीए के वरिष्ठ मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने चले गए। यह मुलाकात अभी जारी है।
बेनतीजा रही सर्वदलीय बैठक, स्थायी समिति को भेजा गया टीम अन्ना का बिल
अन्ना हजारे के अनशन के मुद्दे पर आज पीएम आवास पर हुई सर्वदलीय बैठक में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकलकर सामने आया है। सभी दलों ने अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील है। बैठक में अन्ना की सेहत का मुद्दा उठा। सभी पार्टियों ने इस बात पर सहमति जताई कि राष्ट्रीय सर्वसम्मति से जन लोकपाल बिल बने। पार्टियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि टीम अन्ना से बातचीत के सभी रास्ते खुले रखे जाने चाहिए। सभी पार्टियों की राय थी कि संसदीय व्यवस्था में इस तरह की डेडलाइन संभव नहीं है। टीम अन्ना ने 30 सितंबर तक जनलोकपाल बिल पारित करने की मांग रखी थी।
इस बीच, खबर है कि सरकार ने टीम अन्ना के बिल को संसद की स्थायी समिति में भेज दिया है। केंद्रीय मंत्री नारायण सामी ने बताया कि कार्मिक मंत्रालय ने अन्ना के बिल को स्थायी समिति को भेज दिया है जो अब इस पर विचार करेगी। हालांकि टीम अन्ना ने सरकार के सामने रखी मांगों में यह भी कहा था कि उसके बिल को स्थायी समिति को नहीं भेजा जाए। सूत्रों के मुताबिक सरकार अब सरकारी लोकपाल बिल में बदलाव को भी तैयार है। लेकिन इसे वापस नहीं लिए जाने के संकेत हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने लोकपाल बिल को संसद की स्थायी समिति को भेज दिया था और इस पर सबकी राय मांगी थी।
सरकार ने पहली बार टीम अन्ना की मांगों को सार्वजनिक किया है। जनलोकपाल बिल को लेकर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए पीएम आवास पर सर्वदलीय बैठक में पीएम मनमोहन सिंह ने टीम अन्ना की ये तीन मांगें सभी दलों के सामने रखी और इस पर उनकी राय मांगी। ये तीन मांगें हैं – 1. सरकारी लोकपाल बिल वापस लिया जाए। 2. जनलोकपाल बिल 4 दिन में पेश किया जाए। 3. इसी सत्र में पेश किया जाए जनलोकपाल बिल। टीम अन्ना का कहना है कि इन मांगों पर सरकार से लिखित और ठोस आश्वासन मिले तो अन्ना से अनशन तोड़ने का अनुरोध किया जाएगा। पीएम ने इस मसले पर सभी पार्टियों से उनकी राय मांगी है। बीजेपी ने कहा है कि सरकार यदि लोकपाल बिल वापस ले लेती तो उसे दिक्कत नहीं है। पार्टी ने यह भी कहा है कि सरकार के पास इसके सिवा कोई विकल्प नहीं है।
इस बीच, सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के मुताबिक टीम अन्ना ने आशंका जताई है कि सरकार अन्ना हजारे को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक टीम अन्ना कोर ग्रुप की बैठक के दौरान एक सदस्य अखिल गोगाई ने ऐसी आशंका जताई। गोगोई के मुताबिक अन्ना की सेहत पर नजर रख रहे डॉ नरेश त्रेहन आज दोपहर में पीएम से मिले। त्रेहन ने कल अन्ना को अस्पताल में ले जाने की सलाह दी थी हालांकि अन्ना ने कल ही साफ कर दिया था कि वो अस्पताल में भर्ती नहीं होंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि यदि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया तो उन्हें गेट पर ही रोक लें। (विस्तृत खबर के लिए रिलेटेड लिंक पर क्लिक करें)
इससे पहले टीम अन्ना और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच आज हुई दूसरे दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। सरकार अब भी उन तीन शर्तों को मानने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है जिनपर पहले दौर की बातचीत में मतभेद था। निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने, राज्यों में लोकायुक्त और सिटिजन चार्टर के मुद्दे पर अब भी सरकार सहमत नहीं है। केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के घर हुई बैठक में टीम अन्ना की ओर से अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने हिस्सा लिया। केजरीवाल ने रामलीला मैदान के मंच से कहा कि दूसरे दौर की बैठक में भी तीन मुद्दों पर बात नहीं बन सकी। केजरीवाल ने कहा कि सरकार सिर्फ टालमटोल कर रही है और नतीजा नहीं निकल पा रहा है।
टीम अन्ना ने सरकार के प्रतिनिधियों को ताजा मसौदा पेश किया। सरकार के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से इस ड्राफ्ट पर विचार विमर्श किया। उम्मीद है कि सरकार की ओर से यही ड्राफ्ट सर्वदलीय बैठक में रखा गया जिस पर पीएम आवास में जारी बैठक में मंथन किया गया। पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई अन्ना समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
सलमान खुर्शीद ने इस बात के संकेत दिए कि तकरीबन सभी शर्तों पर सहमति बन गई है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कुछ शर्तों के ड्राफ्ट में लागू करने के तौर-तरीके पर अभी मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि अन्ना का अनशन तुड़वाना बिल पास करने से बड़ी प्राथमिकता है। सूत्र बताते हैं कि सर्वदलीय बैठक से पहले टीम अन्ना को कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी कहा है कि वो अपनी पार्टी का रुख सर्वदलीय बैठक में ही रखेंगे। ऐसे में सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील की है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अन्ना की मांगें मानी जाएंगी लेकिन यह भी कहा गया कि कानून बनाने के लिए वक्त चाहिए। राज्यों में लोकयुक्तों की नियुक्ति पर राज्य और केंद्र के संबंधों को लेकर सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की है। बीजेपी संसदीय दल ने अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि पार्टी सामाजिक कार्यकर्ता की सेहत को लेकर फिक्रमंद है। बीजेपी को प्रस्तावित जनलोकपाल कानून के तहत सांसदों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने पर ऐतराज है।
जन लोकपाल के लिए आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे का अनशन बुधवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। अन्ना की सेहत बिगड़ती ही जा रही है। प्रधानमंत्री ने उनसे अनशन तोड़ने की अपील की, पर वह अड़े हैं। सरकार और टीम अन्ना, दोनों ही चाहते हैं कि अन्ना हजारे का अनशन अब ज्यादा नहीं चलना चाहिए क्योंकि उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
सुलह के लिए मंगलवार को सरकार और टीम अन्ना में पहली बार बातचीत हुई। आज सुबह आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने अन्ना हजारे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद श्री श्री रविशंकर ने पत्रकारों को बताया कि सरकार और टीम अन्ना के बीच बातचीत सही दिशा में है। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय भी आज रामलीला मैदान पहुंची। एनएसी की सदस्य रॉय ने पिछले दिनों लोकपाल के मसले पर तीसरा ड्राफ्ट लाए जाने की बात कर माहौल को गरमा दिया था। आज उन्होंने कहा वह अन्ना से निजी तौर पर मिलने आई हैं और वह अन्ना की सेहत को लेकर चिंतित हैं।
अरविंद केजरिवाल ने कहा कि सरकार ने एक नया ड्राफ्ट बनाया है। किरण वेदी तो काफी गुस्से और हताश थी। उन्होंने तो यहां तक कह डाला कि सरकार ने हमें डांटा है। केजरिवाल के मुताबिक सरकार जनलोकपाल बिल से मुकर रही है। इसकी वजह से अब अन्ना का अनशन नहीं टुटेगा। बैठक के लिए रवाना होने से पहले केजरीवाल ने रामलीला मैदान से कहा कि यदि अन्ना को कुछ हुआ तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी। टीम अन्ना ने दावा किया है कि सरकार अन्ना को जबरदस्ती अस्पताल भेज सकती है। दूसरी ओर, डॉक्टर त्रेहन प्रधानमंत्री ने मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। जहां उन्होंने अन्ना की सेहत की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।
रामलीला मैदान में चल रहे अन्ना हजारे के अनशन ने रामलीला मैदान का तो माहौल गर्म कर ही रखा था लेकिन आज टीम अन्ना ने भी बेहद आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। अरविंद केजरीवाल ने मंच पर आकर दो टूक शब्दों में कहा कि यदि अन्ना को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री कहते हैं कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हम यह साफ करना चाहते हैं कि यदि कुछ भी होता है तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि अब तक उन्हें दो करोड़ लोगों का समर्थन मिल चुका है। लोगों को संबोधित करते हुए अरविंद ने कहा कि अभी तक दो करोड़ लोगों ने मिस कॉल किया है। जो लोग इस बात को सुन रहे हैं वो समझ ले कि दो करोड़ लोग इस आंदोलन के साथ जुड़ चुके हैं।
हमारा कहना है कि सरकार केंद्र में जनलोकपाल लेकर आए और राज्यों में लोकायुक्त लेकर आए। सरकार का पक्ष है कि चिदंबरम और कपिल सिब्बल जी का कहना है कि संवीधान के मुताबिक यह नहीं हो सकता। मेरे पास यह संवीधान है। संवीधान की सूचि में साफ साफ लिखा है कि केंद्र सरकार यह कानून बना सकती है। हम कपिल सिब्बल और चिदंबरम से पूछना चाहते हैं कि किस धारा के तहत ये कानून नहीं बनाया जा सकता। हमसे पूछे हम बता सकते हैं कि किस धारा के तहत यह बन सकता है। अरविंद केजरीवाल ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि यदि अन्ना को कुछ भी हुआ तो सीधे तौर पर जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
प्रणब से टीम अन्ना की मुलाकात जारी
रामलीला मैदान में लोगों के संबोधित करने के बाद अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी यूपीए के वरिष्ठ मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने चले गए। यह मुलाकात अभी जारी है।
बेनतीजा रही सर्वदलीय बैठक, स्थायी समिति को भेजा गया टीम अन्ना का बिल
अन्ना हजारे के अनशन के मुद्दे पर आज पीएम आवास पर हुई सर्वदलीय बैठक में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकलकर सामने आया है। सभी दलों ने अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील है। बैठक में अन्ना की सेहत का मुद्दा उठा। सभी पार्टियों ने इस बात पर सहमति जताई कि राष्ट्रीय सर्वसम्मति से जन लोकपाल बिल बने। पार्टियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि टीम अन्ना से बातचीत के सभी रास्ते खुले रखे जाने चाहिए। सभी पार्टियों की राय थी कि संसदीय व्यवस्था में इस तरह की डेडलाइन संभव नहीं है। टीम अन्ना ने 30 सितंबर तक जनलोकपाल बिल पारित करने की मांग रखी थी।
इस बीच, खबर है कि सरकार ने टीम अन्ना के बिल को संसद की स्थायी समिति में भेज दिया है। केंद्रीय मंत्री नारायण सामी ने बताया कि कार्मिक मंत्रालय ने अन्ना के बिल को स्थायी समिति को भेज दिया है जो अब इस पर विचार करेगी। हालांकि टीम अन्ना ने सरकार के सामने रखी मांगों में यह भी कहा था कि उसके बिल को स्थायी समिति को नहीं भेजा जाए। सूत्रों के मुताबिक सरकार अब सरकारी लोकपाल बिल में बदलाव को भी तैयार है। लेकिन इसे वापस नहीं लिए जाने के संकेत हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने लोकपाल बिल को संसद की स्थायी समिति को भेज दिया था और इस पर सबकी राय मांगी थी।
सरकार ने पहली बार टीम अन्ना की मांगों को सार्वजनिक किया है। जनलोकपाल बिल को लेकर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए पीएम आवास पर सर्वदलीय बैठक में पीएम मनमोहन सिंह ने टीम अन्ना की ये तीन मांगें सभी दलों के सामने रखी और इस पर उनकी राय मांगी। ये तीन मांगें हैं – 1. सरकारी लोकपाल बिल वापस लिया जाए। 2. जनलोकपाल बिल 4 दिन में पेश किया जाए। 3. इसी सत्र में पेश किया जाए जनलोकपाल बिल। टीम अन्ना का कहना है कि इन मांगों पर सरकार से लिखित और ठोस आश्वासन मिले तो अन्ना से अनशन तोड़ने का अनुरोध किया जाएगा। पीएम ने इस मसले पर सभी पार्टियों से उनकी राय मांगी है। बीजेपी ने कहा है कि सरकार यदि लोकपाल बिल वापस ले लेती तो उसे दिक्कत नहीं है। पार्टी ने यह भी कहा है कि सरकार के पास इसके सिवा कोई विकल्प नहीं है।
इस बीच, सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के मुताबिक टीम अन्ना ने आशंका जताई है कि सरकार अन्ना हजारे को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक टीम अन्ना कोर ग्रुप की बैठक के दौरान एक सदस्य अखिल गोगाई ने ऐसी आशंका जताई। गोगोई के मुताबिक अन्ना की सेहत पर नजर रख रहे डॉ नरेश त्रेहन आज दोपहर में पीएम से मिले। त्रेहन ने कल अन्ना को अस्पताल में ले जाने की सलाह दी थी हालांकि अन्ना ने कल ही साफ कर दिया था कि वो अस्पताल में भर्ती नहीं होंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि यदि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया तो उन्हें गेट पर ही रोक लें। (विस्तृत खबर के लिए रिलेटेड लिंक पर क्लिक करें)
इससे पहले टीम अन्ना और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच आज हुई दूसरे दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। सरकार अब भी उन तीन शर्तों को मानने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है जिनपर पहले दौर की बातचीत में मतभेद था। निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने, राज्यों में लोकायुक्त और सिटिजन चार्टर के मुद्दे पर अब भी सरकार सहमत नहीं है। केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के घर हुई बैठक में टीम अन्ना की ओर से अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने हिस्सा लिया। केजरीवाल ने रामलीला मैदान के मंच से कहा कि दूसरे दौर की बैठक में भी तीन मुद्दों पर बात नहीं बन सकी। केजरीवाल ने कहा कि सरकार सिर्फ टालमटोल कर रही है और नतीजा नहीं निकल पा रहा है।
टीम अन्ना ने सरकार के प्रतिनिधियों को ताजा मसौदा पेश किया। सरकार के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से इस ड्राफ्ट पर विचार विमर्श किया। उम्मीद है कि सरकार की ओर से यही ड्राफ्ट सर्वदलीय बैठक में रखा गया जिस पर पीएम आवास में जारी बैठक में मंथन किया गया। पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई अन्ना समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
सलमान खुर्शीद ने इस बात के संकेत दिए कि तकरीबन सभी शर्तों पर सहमति बन गई है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कुछ शर्तों के ड्राफ्ट में लागू करने के तौर-तरीके पर अभी मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि अन्ना का अनशन तुड़वाना बिल पास करने से बड़ी प्राथमिकता है। सूत्र बताते हैं कि सर्वदलीय बैठक से पहले टीम अन्ना को कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी कहा है कि वो अपनी पार्टी का रुख सर्वदलीय बैठक में ही रखेंगे। ऐसे में सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने अन्ना से अनशन खत्म करने की अपील की है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अन्ना की मांगें मानी जाएंगी लेकिन यह भी कहा गया कि कानून बनाने के लिए वक्त चाहिए। राज्यों में लोकयुक्तों की नियुक्ति पर राज्य और केंद्र के संबंधों को लेकर सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की है। बीजेपी संसदीय दल ने अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि पार्टी सामाजिक कार्यकर्ता की सेहत को लेकर फिक्रमंद है। बीजेपी को प्रस्तावित जनलोकपाल कानून के तहत सांसदों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने पर ऐतराज है।
जन लोकपाल के लिए आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे का अनशन बुधवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। अन्ना की सेहत बिगड़ती ही जा रही है। प्रधानमंत्री ने उनसे अनशन तोड़ने की अपील की, पर वह अड़े हैं। सरकार और टीम अन्ना, दोनों ही चाहते हैं कि अन्ना हजारे का अनशन अब ज्यादा नहीं चलना चाहिए क्योंकि उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
सुलह के लिए मंगलवार को सरकार और टीम अन्ना में पहली बार बातचीत हुई। आज सुबह आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने अन्ना हजारे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद श्री श्री रविशंकर ने पत्रकारों को बताया कि सरकार और टीम अन्ना के बीच बातचीत सही दिशा में है। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय भी आज रामलीला मैदान पहुंची। एनएसी की सदस्य रॉय ने पिछले दिनों लोकपाल के मसले पर तीसरा ड्राफ्ट लाए जाने की बात कर माहौल को गरमा दिया था। आज उन्होंने कहा वह अन्ना से निजी तौर पर मिलने आई हैं और वह अन्ना की सेहत को लेकर चिंतित हैं।


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